मर्द-ए-ज़िगर

जमाने ने कह दिया मर्द को दर्दः नहीं होता

और मर्द भी चुप बेठ गया अपने ग़मो को समेट कर

ज़माना डरता रहा कहीं मर्ददिल को टटोला गया तो सेहलाब ना आ जाये

मर्ददर्दः की चींख से कहीं क़यामत ना आ जाये

मर्द कितना कमजोर है मर्द कितना लाचार है

तभी तो घुटघुट के जीता रहा और फ़ना होता रहा

यारो तभी तो घुटघुट के जिते गए और फ़ना होते गए

जाते भी कहा अपना दर्दः भरा फसाना लेकर

जाते भी कहा यारों अपनी दर्दः भरी फ़रीयाद लेकर

कुछ ने काफिर तो कुछ ने जल्लाद के

ख़िताब से नवाजा हैं मर्दज़िगर को

मैं तो भवरा हूँ तेरे हि बागीचे का

तेरी हि एक आंख हूँ जिसे तू देखता है

ज़रा देख मर्दज़िगर में कितना दर्दः भरा है

ज़रा देख मर्ददिल में कितना गम भरा है

अपने दर्दःदिल को मर्द बयां करने चला है

ज़ख्मीमर्ददिल को भी एक मौका दे दे

कुछ गुफ़्तगू वो भी कर सके अपने ज़ख्मी दिल का

कुछ अपने आंसू वो बहने दे और कुछ दर्द वो बाँट सके

अगर अब भी यक़ीन नहीं मेरे अल्फाज़ो पर

आ बैठ के नज़ारा देखे जंतर मंतर का

सत्याग्रह कल भी था सत्याग्रह आज भी है

एक 5 मई को था एक 29 अप्रैल को है

सरकार कल भी चुप थी सरकार आज भी चुप है

मर्द कल भी बेबस था मर्द आज भी बेबस है

मर्द कल भी तनहा था मर्द आज भी तनहा है

मर्द कल भी ज़ख्मी था मर्द आज भी ज़ख्मी है

जरा थाम लो दामन मेरा,

रूह में थोड़ी जान आजाए

जरा थाम लो दामन मेरा,

शायद तेरि नजरो से मेरा दर्द नजर आ जाए

ज़ख्मी मर्द

दामन वेलफेयर सोसाइटी।

#satyagrah4men

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