केशव & शर्मा : समाज सेवक

 

Dr. G.Singh

 

शर्मा : केशव जी आज शाम को नीतू का परिवार आ रही है अपने रोशन को देखने

केशव : ठीक है उन्हें राजीव के घर पर ले आइये राजीव का ऊपर वाला कमरा खाली है

शर्मा : अरे आपके घर पर क्यों नहीं

केशव : शाम को बताऊंगा

शर्मा : ठीक

उसी दिन शाम को राजीव के कमरे मैं

केशव : नमस्कार पाठक साहब आपका स्वागत है

पाठक : नमस्कार

केशव : आपका भी स्वागत है शर्मा जी

शर्मा : नमस्कार केशव जी

केशव : आइये पहले कुछ चाय पानी हो जाये उसके बाद आराम से बातचीत करेंगे

पाठक : केशव जी नीतू को तो आपने और रोशन ने देख ही लिया था और पसंद भी कर लिया था और आज हम लोग रोशन और आपके घर परिवार को देखने आये थे परन्तु जहां तक मुझे बताया गया था आपका अपना बंगला है इसी एरिया मैं परन्तु इस वक़्त जहां हम बैठे है यह तो किराये का लग रहा है

केशव : नहीं पाठक साहब यह किराये का नहीं है और मेरा मकान यहीं पास मैं ही है

पाठक : तो क्या आपके बंगले पर कुछ काम वगैरह चल रहा है

केशव : जी नहीं मेरा मकान बिलकुल ठीक ठाक है

पाठक : तो क्या यह बेहतर नहीं होता की आप हमें अपने बंगले पर बुलाते

केशव : नहीं पाठक साहब आप यहां इसीलिए हैं ताकि उस जगह को अच्छी तरह देख सकें जहां शादी के पश्चात् आपकी लड़की को रहना है

पाठक : आप शायद मजाक कर रहे है केशव जी रोशन तो आपके साथ ही रहता है ना

केशव : नहीं पाठक साहब मैं मजाक नहीं कर रहा अभी रोशन मेरे साथ रहता है परन्तु शादी के पश्चात् किराये की मकान मैं चला जायेगा और शायद इसी कमरे मैं ही आ जाये

पाठक : ऐसा क्यों

केशव : ऐसा इसीलिए क्योंकि रोशन और नीतू की कमाई से इससे बड़ा फ़्लैट किराये पर नहीं लिया जा सकता

पाठक : परन्तु उनको किराये के मकान की जरूरत क्यों है रोशन आपके साथ रहता है नीतू भी आपके बंगले पर ही रह सकती है

केशव : नहीं यह नहीं हो सकता

पाठक : केशव जी परन्तु यह क्यों नहीं हो सकता

केशव : देखिये मैंने रोशन को पढ़ा दिया मेरी जिम्मेदारी ख़तम हो गयी अब उसको सोचना है की वह अपनी ज़िंदगी कहां और कैसे बिता सकता है

पाठक : परन्तु इस बात का किराये के मकान से क्या लेना देना

केशव : मैंने बांग्ला अपने लिए बनाया है और मैं उसमे मजे से रहना चाहता हूँ

पाठक : माफ़ी चाहूंगा केशव जी तब मुझे यह शादी मंजूर नहीं

केशव : क्यों भला

पाठक : अरे मैं अपनी लड़की को ऐसे लड़के से शादी नहीं कर सकता जिसके पास रहने की जगह भी ना हो

केशव : बहुत बढ़िया

पाठक : तो आप शादी से इंकार करने का बहाना तलाश कर रहे हैं

केशव : नहीं यह तो आपका निश्चय है वैसे रहने के लिए जगह तो कोई समस्या नहीं है रोशन और नीतू आप जो बांग्ला नीतू को देंगे उसमे भी रह सकते हैं

पाठक : आप दहेज़ मांग रहे हैं ?

केशव : बिलकुल नहीं मैं तो बच्चों को यहां शिफ्ट होने को कह रहा हूँ आपको आपत्ति है इसमें

पाठक : दहेज़ मांगने का शायद यह नया तरीका है

केशव : मैं दहेज़ नहीं मांग रहा और आपके बंगले पर आपकी लड़की का कानूनी हक़ है जाहिर है आप अपनी लड़की को उसका कानूनी हक़ तो देंगे ही आखिर आप और आपकी पत्नी समाज सेवक है और महिला अधिकारों के बहुत बड़े प्रचारक भी

केशव : दूसरी बात जब हम आपके घर आये थे तब आपने दहेज़ एवं महिला अधिकारों पर जो लम्बा चौड़ा भाषण दिया था वह क्या सिर्फ सुनाने के लिए ही था

पाठक : साफ़ साफ़ बताइये क्या कहना चाहते हैं

केशव : यही की सारा का सारा वूमेन एम्पावरमेंट क्या पति परिवार से करवाएंगे अपनी लड़की को जो उसका कानूनी हक़ है वह नहीं देंगे

पाठक : परन्तु शादी के बाद लड़की अपने पति और सास ससुर के साथ रहती है उसे रहने की जगह देना आपका जिम्मेदारी है यही भारतीय संस्कृति है

केशव : भारतीय संस्कृति की बात मत कीजिये अगर आपको भारतीय संस्कृति की बात करनी है तो भारतीय संस्कृति के मुताबिक तो आप जहां अपनी लड़की की शादी करना चाहते है या करते है वहां का पानी भी नहीं पीते

केशव : चलिए छोड़िये इस बात को आपकी संस्था ने हाई कोर्ट मैं #MaritalRape पर #PIL लगा राखी है क्यों वह भारतीय संस्कृति है इसीलिए हम भारीतय संस्कृति की बात न करते हुए आगे बड़े तो बढिये रहेगा

पाठक : तो आपको बांग्ला चाहिए

केशव : नहीं साहब यह आपकी लड़की का कानूनी हक़ है

पाठक : यह आपकी समस्या नहीं है यह मेरे और मेरी बेटी के बीच का मामला है

केशव : बेशक यह आपके और आपकी बेटी के बीच का मामला है वैसे ही रोशन कहां रहता है और उसको मुझसे क्या मिलता है क्या नहीं यह मेरे और मेरे बेटे के बीच का मामला है आपको इस बारे मैं पूछना ही नहीं चाहिए था आपको सिर्फ और सिर्फ रोशन के बारे मैं पता करना चाहिए था

पाठक : मेरी लड़की किस घर मैं जाएगी वह खाता पीता परिवार हो यह देखना मेरा जिम्मेदारी है

केशव : और मेरे लड़के की शादी जिस घर मैं हो रही है वह खाता पीता है या नहीं यह देखन भी शायद मेरी जिम्मेदारी है चलिए मेरी ना मानिये पर रोशन की जिम्मेदारी तो है ही

पाठक : हम्म

 

MORAL : समाज सेवा की शुरुआत अपने घर से करें

NOTE : This script is based on true discussion on Facebook with a social worker. More facts from same discussion will be disclosed by another scripts.

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