केशव & शर्मा : केशव के पिता जी बीमार हैं

केशव के पिता जी बीमार हैं

Dr. G.Singh

शर्मा : केशव जी सुना है आपके पिता जी बीमार हैं
केशव : जी हाँ
शर्मा : आप और आपका परिवार कब जा रहे हैं
केशव : मैं शाम को जा रहा हूँ और परिवार जरा कान लगा कर सुनिए और खुद समझ लीजिये

शर्मा जी ध्यान से सुनते हैं

रोशन : माँ हमें पिता जी के साथ गाओं जाना चाहिए
गायत्री : तुम्हारे पिता जा रहे हैं हमे जाने की जरूरत नहीं है
रोशन : दादा जी बीमार हैं और हमे उनकी देखभाल के लिए जाना चाहिए
गायत्री : उनकी देखभाल के लिए तुम्हारे चाचा चाची है गाओं मैं
रोशन : हमारा भी कुछ फ़र्ज़ बनता है
गायत्री : उन्हें कुछ नहीं हुआ है 80 साल के हैं अब और कितना चलेंगे
रोशन : हो सकता है उनका वक़्त आ गया हो परन्तु इसका मतलब यह तो नहीं की हम उनका हाल चाल पूछना भी छोड़ दे
गायत्री : मुझे बहस नहीं करनी | वैसे भी उनकी देखभाल के लिए तुम्हारे चाचा चाची हैं
रोशन : ठीक हम बहस नहीं करते परन्तु पिछले साल जब नाना जी बीमार हुए थे तब आप पूरा 1 महीना उनके पास रुकी थी
गायत्री : उनकी बात और थी
रोशन : सिर्फ इतना ही तो फरक था की वह आपके पिता थे और इस बार जो बीमार है वह पिता जी के पिता जी है
गायत्री : देखभाल के लिए चाचा चाची है न
रोशन : नाना जी की देखभाल के लिए भी तो मामा मामी थे न
गायत्री : दो अक्षर क्या पढ़ गया अब तू मुझे सिखाएगा

केशव : हाँ तो शर्मा जी अब बताइये क्या परिवार साथ मैं जा रहा है
शर्मा : लगता तो नहीं पर रोशन जाना चाहता है
केशव : हां उसे ले कर जाऊँगा
शर्मा : ठीक  और भाभी जी के बारे मैं क्या विचार है
केशव : रोशन बड़ा हो रहा है शायद कुछ सालों बाद उसकी शादी हो जाएगी तब गायत्री को समझ आसानी से आ जाएगा
शर्मा : ठीक

 

 

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